अवसाद या डिप्रेशन क्या है इसके कारण लक्षण व उपचार

अवसाद या डिप्रेशन क्या है इसके कारण लक्षण व उपचार

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और तेजी से बदलते हुए समय में किसी भी इंसान का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत कठिन हो गया है आज के समय में हर कोई इंसान शारीरिक या मानसिक रोग से ग्रस्त है और ज्यादातर लोगों में शारीरिक समस्या के मुकाबले मानसिक रोग ज्यादा देखने को मिल रहे हैं क्योंकि ज्यादातर लोगों में काम का बोझ पड़ जाने से अपने शरीर के ऊपर इतना ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते जिनसे उन्हें मानसिक रोग होने लगते हैं तो इस ब्लॉग में हम इसी तरह के रोग अवसाद या डिप्रेशन के बारे में बात करेंगे जो कि बहुत तेजी से फैल रहा है इस ब्लॉग में हम डिप्रेशन उत्पन्न होने के कारण लक्षण व उपचार आदि के बारे में बताएंगे

डिप्रेशन (अवसाद) क्या है

ज्यादातर लोग में को डिप्रेशन या अवसाद रोग की परिभाषा के बारे में ही जानकारी नहीं है लेकिन अवसाद या डिप्रेशन रोग एक ऐसा खतरनाक मानसिक रोग है जिससे रोगी मानसिक रूप से बिल्कुल कमजोर हो जाता है और वह बिल्कुल अकेला महसूस करने लगता है और इससे उसके शरीर में कई अन्य समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती है एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अवसाद के लगभग 7% लोग हैऔर हर साल डिप्रेशन या अवसाद रोग से लगभग 11 लाख लोग अपनी जान गवा देते हैं और इन रोगियों की मौत का सबसे बड़ा कारण आत्महत्या होता है और यह रोग पूरी दुनिया के लिए एक चिंता का विषय बन चुका है क्योंकि यह रोग सिर्फ भारत में नहीं बल्कि दुनिया के हर एक कोने में फैल चुका है और ऐसा नहीं है कि यह रोग किसी विशेष व्यक्ति या महिला को ही होता है बल्कि यह एक ऐसा रोग है जो कि शारीरिक रूप से स्वस्थ महिला या पुरुष को अपनी चपेट में ले सकता है यह रोग ज्यादातर 25 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में ज्यादा देखने को मिल रहा है और यह लोग अलग-अलग प्रकार का होता है

अवसाद या डिप्रेशन के कारण

अवसाद या डिप्रेशन रोग के कारणों के बारे में बात की जाए तो इस समस्या के उत्पन्न होने के पीछे बहुत सारे कारणों का हाथ हो सकता है जैसे शारीरिक व मानसिक शोषण, काम का दबाव, गरीबी, भुखमरी, कमजोरी, कुपोषण, बेरोजगारी आदि, ज्यादा नशीली दवाओं का सेवन करना, लंबे समय तक एलोपैथिक दवाओं का सेवन करना, रोगी का किसी विशेष घटना या दुर्घटना के बारे में गहराई से सोचना, रोगी के दिमाग पर गहरी चोट लगना, रोगी का किसी से लड़ाई झगड़ा होना, हॉर्मोन, मौसम, रोगी के किसी करीबी की मौत होना, लंबे समय तक अकेले रहना, एक जगह पर बैठे बैठे काम करना, अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा न करना, पति पत्नी के साथ अनबन होना, बच्चों की पढ़ाई लिखाई का बोझ होना, मानसिक, तनाव, चिंता, घुटन व घबराहट रहना, रोगी के मन में डर का भाव होना ज्यादा चाय, कॉफी, शराब, बीड़ी, सिगरेट आदि का सेवन करना, ज्यादा तले हुए भोजन का सेवन करना आदि इस समस्या के मुख्य कारण होते हैं

अवसाद या डिप्रेशन के लक्षण

अगर किसी इंसान में डिप्रेशन या अवसाद रोग उत्पन्न हो जाता है तब इससे रोगी की रोगी के रहन-सहन और रोगी के स्वभाव में बदलाव देखने को मिलते हैं जैसे रोगी का बार बार चिल्लाना, गुस्सा होना या रोना, रोगी का उदास रहना, रोगी का किसी काम में मन न लगना, रोगी का हर किसी को नजरअंदाज करना, रोगी के चेहरे पर कमजोरी, थकान व घबराहट दिखाई देना, रोगी बिल्कुल कमजोर हो जाना, रोगी के सिर में हल्का दर्द रहना, रोगी को बार-बार हल्का बुखार आना, रोगी के कमर, बदन और घुटनों आदि में दर्द रहना, रोग उत्पन्न होना, रोगी का ज्यादा नशीली वस्तुओं का सेवन करना, रोगी को भूख प्यास न लगना, रोगी को नींद ज्यादा आना, रोगी का बार-बार किसी घटना के बारे में बातें करना, रोगी का अकेले रहना, रोगी का किसी से बात नहीं करना, रोगी का एक ही जगह पर लंबे समय तक रहना, रोगी में चिड़चिड़ापन, नफरत जैसी समस्याएं उत्पन्न होना, रोगी के मन में उदासी, असंतोष, खालीपन व आत्महत्या के विचार उत्पन्न होना, रोगी का बार-बार किसी से लड़ाई झगड़ा करना, रोगी का किसी से मारपीट करना या अपने शरीर को नुकसान पहुंचाना जैसे हाथ की नसें काट ना फांसी लगाना व मरने आदि की बातें करना इसके अलावा भी इस समस्या के बहुत सारे लक्षण दिखाई दे सकते हैं

क्या करें

  • रोगी को हर रोज सुबह सुबह घूमने जाना चाहिए
  • रोगी को हर रोज व्यायाम प्राणायाम व जिम आदि करनी चाहिए
  • रोगी को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ रहना चाहिए और हंसी मजाक करते रहना चाहिए
  • रोगी को हमेशा हल्का व सुपाच्य भोजन करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा से ज्यादा फलों व सब्जियों का सेवन करना चाहिए
  • रोगी को हर रोज 5 से 8 लीटर तक पानी का सेवन करना चाहिए
  • रोगी को डॉक्टर द्वारा बताए गए पोषक तत्वों का नियमित रूप से ग्रहण करना चाहिए
  • रोगी को विटामिन बी, साबुत अनाज, बदाम, पालक, दूध आदि खाने चाहिए
  • रोगी को कीवी, टमाटर, ब्लूबेरी, अंगूर, संतरा काली मिर्च और आलू जैसी सब्जियों का सेवन करना चाहिए
  • रोगी को अपने भोजन में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन युक्त पदार्थों को शामिल करना चाहिए
  • रोगी को हमेशा समय पर ही भोजन करना चाहिए वह भोजन करने के बाद थोड़ा बहुत घूम लेना चाहिए

क्या न करें

  • रोगी को अपने शरीर में आलस उत्पन्न नहीं होने देना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा मिर्च मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा नशीली दवाओं व नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को बीड़ी सिगरेट तंबाकू आदि का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा हस्तमैथुन व शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए
  • रोगी को अकेला बिल्कुल भी नहीं रहना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा मैदे और चीनी आदि से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा कुरकुरे चिप्स वह भुजिया और जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को बे मौसमी भोजन व बासी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को बिना भूख के भोजन नहीं करना चाहिए

लेकिन फिर भी अगर किसी इंसान में अवसाद या डिप्रेशन की समस्या उत्पन्न होती है तो उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए क्योंकि यह एक बहुत ही खतरनाक मानसिक रोग है जिससे रोगी बिल्कुल बुरी तरह प्रभावित हो सकता है इसलिए इस समस्या में देरी करना जान से खेलने के बराबर है

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