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क्षय रोग टीबी क्या है इसके कारण लक्षण बचाव व उपचार

क्षय रोग टीबी  क्या है इसके कारण लक्षण बचाव व उपचार

हमारा शरीर मशीन की तरह होता है जिस तरह से कुछ समय के बाद मशीन को आराम चाहिए होता है और समय-समय पर उसकी रिपेयरिंग करवानी होती है उसी तरह से हमारे शरीर को भी आराम की जरूरत होती है और समय-समय पर हमें अपने टेस्ट आदि करवाने की जरूरत पड़ती है जिससे हमारे शरीर की कमी के बारे में पता लगाया जा सकता है और फिर हम दवाई या कुछ सावधानियों के जरिए

हमारे शरीर में होने वाले रोगों से पहले ही उनसे बच सकते हैं लेकिन कई लोग ऐसी गलतियां कर देते हैं जिनसे उनके शरीर में कई नई नई बीमारियां उत्पन्न होने लगती है इसी तरह से क्षय रोग या टीबी रोग भी एक ऐसा रोग है जो कि हर साल लाखों लोगों की जान ले लेता है तो आज के इस ब्लॉग में हम क्षय रोग या टीबी रोग के कारण, लक्षण, बचाव व इसके उपचार आदि के बारे में बात करेंगे

क्षय रोग

क्षय रोग एक ऐसी संक्रामक बीमारी है जो कि एक दूसरे इंसान में आसानी से फैल सकती है क्योंकि क्षय रोग में रोगी के हृदय में बलगम इकट्ठा हो जाता है जिसमें बहुत ही छोटे-छोटे जीवाणु होते हैं और उन जीवाणुओं की वजह से रोगी के शरीर में दर्द व बार बार खांसी, छींक आने की समस्या उत्पन्न होती है जब कोई रोगी खाँसता है रोगी के मुँह से बहुत ही सूक्ष्म जीवाणु सामने वाले इंसान तक पहुंच जाते हैं और फिर धीरे-धीरे उस इंसान को भी यह रोग होने लगता है

इस संक्रामक बीमारी के जीवाणु का नाम माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस होता है वैसे तो टीवी रोग ज्यादातर 20 वर्ष की ऊपर की आयु के लोगों में होता है लेकिन कई बार यह रोग छोटी उम्र की आयु वाले बच्चों में भी हो सकता है एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल टीवी के लगभग 19 लाख नए केस आते हैं और बहुत सारे लोगों को सही इलाज के जरिए इस रोग से छुटकारा भी मिल जाता है भारत सरकार द्वारा इस रोग का निशुल्क उपचार किया जाता है टीबी रोग से बचने के लिए भारत सरकार द्वारा मुफ्त टीकाकरण किया जाता है जिसके तहत बी.सी.जी का टीका लगाया जाता है यह टीका आपके बच्चों को जन्म के बाद लगाया जाता है

क्षय रोग के कारण

अगर इस समस्या के कारणों के बारे में बात की जाए तो इस समस्या के पीछे कई कारण होते हैं जिनसे किसी स्वस्थ इंसान के शरीर में माइक्रो बैक्टीरिया ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु पहुंच जाता है जैसे लंबे समय तक रोगी के आसपास रहना, रोगी के बिस्तर, कपड़े आदि का इस्तेमाल करना, रोगी के बलगम को छूना, रोगी की खींकते समय सामने आना, रोगी के झूठे बर्तन में खाना खाना,

रोगी के बचे भोजन व पानी को पीना, रोगी के आसपास साफ-सफाई न रखना आदि इस समस्या के कारण होते हैं जिनसे यह रोग आपको भी चपेट में ले सकता है इसलिए इस रोग के होने पर रोगी के आसपास के सभी लोगों को साफ सफाई रखना जरूरी है एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई रोगी 1 साल तक अपना इलाज नहीं करवाता तब वह लगभग 10 से 15 नए लोगों को संक्रमित कर सकता है

क्षय रोग के लक्षण

अगर किसी इंसान को क्षय रोग रोग हो जाता है तब उसमें कई लक्षण देखने को मिल सकते हैं जैसे 2 सप्ताह या इससे अधिक खांसी रहना, शाम के समय में बुखार आना, रोगी को भूख प्यास न लगना, रोगी के हृदय में जलन होना, रोगी के शरीर का वजन घटना, रोगी के शरीर में घरघर की आवाज आना, रोगी की खांसी के साथ बलगम निकलना, रोगी के बलगम के साथ खून आना, रोगी के बलगम का रंग पीला होना,

रोगी की आंखें व नाखून पीले होना, रोगी को आलस, बेचैनी व घबराहट रहना रोगी में एनीमिया रोग होना, रोगी के हृदय की धड़कन बढ़ना, रोगी को रात के समय में पसीना आना, स्त्रियों में मासिक धर्म बंद होना, रोगी को दुर्गंध महसूस होना, रोगी की सांस फूलना, रोगी को नींद ना आना, रोगी की जीभ में घाव होना, रोगी की छाती में घाव होना, रोगी को सांस लेने में कठिनाई होना, आदि इस समस्या के मुख्य लक्षण होते होते हैं लेकिन इसके अलावा भी इस समस्या के बहुत सारे और लक्षण होते हैं

बचाव

अगर आपके आसपास या आपके परिवार में कोई आदमी क्षय रोग से ग्रस्त है तब आपको बचाव के लिए बहुत सारी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है जिससे यह रोग आप तक न पहुंच पाए जैसे

  • आपको रोगी के मुंह के सामने नहीं बैठना चाहिए
  • आपको रोगी के सामने जाते समय मुंह पर कपड़ा व मस्का लगाना चाहिए
  • आपको रोगी के बलगम व कपड़े और बिस्तर आदि को छूने के बाद अच्छे से हाथ धोने चाहिए
  • आपको रोगी की झूठी चीजों को खाने पीने से बचना चाहिए
  • आपको रोगी के बिस्तर, कपड़े बर्तन आदि इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
  • आपको अपने छोटे बच्चों को रोगी से दूर रखना चाहिए
  • अपने छोटे बच्चों को बी.सी.जी का टीका लगवाना चाहिए
  • अगर आपको 2 सप्ताह से ज्यादा खांसी रहती है तब आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और टेस्ट करवाने चाहिए
  • अगर आपके बलगम में खून आ रहा है या आपको कई दिन से शाम के समय बुखार रहता है तब आपको डॉक्टर से चेकअप करवाना चाहिए

उपचार

  • रोगी को हर रोज 100 ग्राम हल्दी को कूटकर हल्दी में आक का दूध मिला कर शहद के साथ सेवन करना चाहिए
  • रोगी को तुलसी के पत्तों को जीरा व हींग के साथ मिलाकर एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर दिन में तीन से चार बार पीना चाहिए
  • रोगी को हर रोज चार-पांच तुलसी के पत्ते और काली मिर्च के दाने पीसकर शहद में मिलाकर चाटने चाहिए
  • रोगी को हर रोज एक से दो लहसुन की कच्ची कली खा कर पानी पीना चाहिए यह आपके हृदय के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि यह टीबी के बैक्टीरिया को खत्म कर देता है
  • रोगी को हर रोज एक चुटकी हींग को आधे क़प प्याज के रस में मिलाकर खाली पेट लेना चाहिए
  • रोगी को हर रोज एक कप दही एक चम्मच शहद व एक कप नारियल का पानी और एक पका हुआ केला मिलाकर दिन में एक से दो बार खाना चाहिए
  • रोगी को आंवले के बीज का रस निकालकर हर रोज इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर खाना चाहिए

लेकिन अगर किसी इंसान को टीवी के शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं तब उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपने टेस्ट आदि करवाने चाहिए और दवाई लेनी चाहिए क्योंकि अगर आप इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर नियंत्रण पा लेते हैं आप ही से तुरंत छुटकारा भी पा सकते हैं

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