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गर्दन का दर्द सर्वाइकल पेन के कारण लक्षण बताओ व उपचार

गर्दन का दर्द सर्वाइकल पेन के कारण लक्षण बताओ व उपचार

बढ़ती आयु के साथ साथ हमारा शरीर बिल्कुल बदल जाता है और हमारे शरीर में अलग-अलग प्रकार की बीमारियां जन्म लेने लगती है लेकिन कई बार हमारे शरीर में ऐसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है जो कि बूढ़े लोगों में उत्पन्न होती है इसी तरह से सर्वाइकल पेन या गर्दन का पेन भी एक ऐसी ही समस्या है जो कि ज्यादातर बूढ़े और बुजुर्ग लोगों में उत्पन्न होती है.

लेकिन तेजी से बदलते समय में सही खानपान ने मिलने के कारण यह समस्या कम उम्र के लोगों में भी उत्पन्न होने लगी है तो आज के इस ब्लॉग में हम गर्दन के दर्द के बारे में विस्तार से बातें करने वाले हैं इस ब्लॉग में हम गर्दन दर्द के उत्पन्न होने के कारण लक्षण बचाव व उपचार आदि के बारे में विस्तार से जानेंगे

गर्दन का दर्द ( सर्वाइकल पेन )

वैसे तो इस समस्या को सर्वाइकल पेन बोला जाता है जो कि एक बुजुर्ग लोगों में उत्पन्न होने वाला रोग है इस रोग के कारण बुजुर्ग लोग बहुत ज्यादा परेशान होते हैं लेकिन आजकल यह रोग कम उम्र के लोगों में भी दिखाई दे रहा है जिससे रोगी के गर्दन के पीछे की साइड सूजन व तेज दर्द होता है यह रोग यह दर्द ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण उत्पन्न होने वाला दर्द है जो हमारे शरीर के जोड़ों, हड्डियों और डिस्क में बदलाव के कारण उत्पन्न होता है.

क्योंकि हमारी गर्दन के आस पास बहुत सारी नसें व जोड़ होते हैं और यह दर्द वही होता है वैसे तो इस समस्या को ठीक करने के लिए डॉक्टर अलग-अलग व्यायाम व योगासन करने की सलाह देते हैं लेकिन साथ ही रोगी को इस समस्या का इलाज करवाना भी बहुत जरूरी है क्योंकि अगर आप इस समस्या को लंबे समय तक बिना इलाज के छोड़ देते हैं तब यह आपके लिए घातक साबित हो सकती है

कारण

वैसे तो यह रोग बुजुर्ग लोगों में कमजोरी व किसी अन्य बीमारी के उत्पन्न होने के कारण भी उत्पन्न होता है लेकिन इस समस्या के कई और कारण भी होते हैं जैसे गर्दन पर ज्यादा दबाव व वजन डालना, गर्दन में झटका लगना, गर्दन के आसपास गहरी चोट लगना, गर्दन में मौजूद मांसपेशियों में खिंचाव आना, गर्दन की मांसपेशियां कमजोर होना, गर्दन की आस पास की हड्डियों के जोड़ हिलना, रीड की हड्डी में चोट लगना, रीड की हड्डी में खिंचाव आना,

इस समस्या का सबसे बड़ा कारण है रोगी का एक तरह ज्यादा सोना, रोगी की गर्दन की एक साइड ज्यादा वजन व दबाव डालना, रोगी का ज्यादा कठोर कार्य करना, रोगी के गर्दन के आसपास घाव व संक्रमण होना, रोगी की रीड की हड्डी में ऑपरेशन होना, रोगी का रोगी का ज्यादा कठोर व्यायाम व प्राणायाम करना, रोगी का मानसिक तनाव रखना आदि इस समस्या के मुख्य कारण होते हैं इसके अलावा भी इस समस्या के उत्पन्न होने के कई और कारण हो सकते हैं

लक्षण

अगर इस समस्या के लक्षणों के बारे में बात की जाए तब तो इस समस्या के उत्पन्न होने पर रोगी में कई लक्षण देखने को मिल सकते हैं जिनको आप आसानी से पहचान सकते हैं जैसे रोगी के हाथ पैर में कमजोरी आना, रोगी के कंधों में दर्द होना, रोगी के कंधों में आवाज आना, रोगी के कंधों में सूजन आना, रोगी की गर्दन में सूजन आना, रोगी की गर्दन के आसपास खिंचाव होना, रोगी की गर्दन को हिलाते डुलाते समय तेज दर्द होना,

रोगी को उठने बैठने में परेशानी होना, रोगी का काम न कर पाना, रोगी को चलने फिरने में परेशानी होना, रोगी के शरीर में अकड़न होना, रोगी की गर्दन की मांसपेशियों में ऐंठन होना, रोगी की कार्यशैली में बदलाव आना, रोगी की मांसपेशियां उभरी हुई दिखाई देना, रोगी को गर्दन घुमाने में परेशानी होना, यह कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जो कि सर्वाइकल पेन या गर्दन दर्द के रोगियों में देखने को मिलते हैं अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देता है तब आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और अपनी गर्दन के टेस्ट करवा कर इलाज शुरू करवाना चाहिए

बचाव

अगर आप इस समस्या से बताना चाहते हैं तब आपको कुछ ऐसी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है जो कि आप को इस समस्या से बता सकती हैं जैसे

  • रोगी को ज्यादा कठोर परिश्रम नहीं करना चाहिए
  • रोगी को एकदम से किसी चीज के ऊपर ज्यादा जोर नहीं लगाना चाहिए
  • रोगी को अपने शरीर के ऊपर ज्यादा वजन नहीं उठाना चाहिए
  • रोटी को अपने कंधों के ऊपर वजन उठाने से बचना चाहिए
  • रोगी को आपको अपनी गर्दन में झटका लगने पर किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा कठोर एक्सरसाइज नहीं करने चाहिए
  • रोगी को ज्यादा ही ज्यादा पौष्टिक चीजों का सेवन करना चाहिए
  • रोगी को एक साइड ज्यादा देर तक नहीं सोना चाहिए
  • रोगी को हर रोज हल्के-फुल्के व्यायाम व प्राणायाम आदि करते रहना चाहिए
  • रोगी को अपने शरीर का वजन नियंत्रण में रखने की कोशिश करनी चाहिए
  • रोगी को गर्दन में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से चेकअप करवाना चाहिए
  • आपको ज्यादा से ज्यादा सूर्य नमस्कार वक्रासन वह भुजंगासन जैसे आसन करने चाहिए
  • रोगी को पूरा दिन खाली नहीं बैठना चाहिए
  • आपको अपनी गर्दन को गर्म पानी से सीखना चाहिए
  • गर्दन की मांसपेशियों में जकड़न होने पर आपको गर्म तेल की मालिश करवानी चाहिए
  • रोगी को अपने हाथों से ज्यादा वजन नहीं उठाना चाहिए

उपचार

वैसे तो इस समस्या को आप कुछ एक्सरसाइज व योगासन के जरिए नियंत्रण में कर सकते हैं लेकिन अगर आपकी गर्दन में फिर भी तेज दर्द होता है तब आपको तुरंत डॉक्टर से अपनी गर्दन के चेकअप करवाने चाहिए डॉक्टर आपको कई तरह की अलग-अलग थेरेपी व योगासन बताते हैं जिनसे आपकी इस समस्या को नियंत्रण में किया जा सकता है और कई दवाइयां भी दी जाती है इसके अलावा आपको हर रोज सूर्यनमस्कार, भुजंगासन व वक्रासन जैसे आसन करना बहुत जरूरी है

लेकिन फिर भी अगर आपकी गर्दन में बार-बार तेज दर्द हो रहा है तब आप कुछ आयुर्वेदिक औषधियों व आयुर्वेदिक तेल आदि का इस्तेमा तेल आदि का इस्तेमाल करके अपनी इस समस्या को कुछ हद तक नियंत्रण में कर सकते हैं जिनके बारे में हमने आपको नीचे बताया है इन सभी चीजों को आप डॉक्टर की देखरेख में ही इस्तेमाल करें.

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