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चेचक छोटी माता के कारण लक्षण बचाव व उपचार

चेचक छोटी माता  के कारण लक्षण बचाव व उपचार

वैसे तो हमारी त्वचा से जुड़े हुए बहुत सारे रोग होते हैं लेकिन इन सभी रोगो को हम दवाइयों या कुछ आयुर्वेदिक औषधियों से आसानी से ठीक भी कर लेते हैं लेकिन कई बीमारियां ऐसी होती है जो कि हमें बहुत ज्यादा कष्ट देती है इसी तरह से चेचक या छोटी माता भी एक ऐसी खतरनाक बीमारी है

जिससे रोगी बहुत ज्यादा परेशान होता है और एक बार होने पर रोगी की हालात बिल्कुल खराब हो जाती हैं और यह बीमारी रोगी की त्वचा के ऊपर होती है जिससे रोगी की त्वचा बिल्कुल खराब हो जाती है तो आज किस ब्लॉग में हम इसी समस्या के उत्पन्न होने के कारण लक्षण व इसके बचाव के तरीके आदि के बारे में बताने वाले हैं

चेचक  छोटी माता  क्या होती है

वैसे तो इस बीमारी का नाम चेचक रोग होता है लेकिन आम भाषा में इसको छोटी माता या इसके अलावा भी कई और नामों से पुकारा जाता है लेकिन इन सभी का मतलब एक ही होता है यह एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिससे रोगी की त्वचा के ऊपर दाने निकल जाते हैं और कई बार उन दानों में पानी भी होता है जिससे रोगी को जलन, झुंझ व दर्द होने लगता है और इस बीमारी के उत्पन्न होने पर रोगी के सर से पांव शरीर के सभी अंगों पर छोटे छोटे दाने होते हैं और कई बार यह दाने बड़े भी हो जाते हैं यह बीमारी एक संक्रामक बीमारी है जिससे यह एक रोगी से दूसरी रोगी को आसानी से हो सकती है

लेकिन अगर इस समस्या के शुरुआती लक्षणों को ध्यान में रखा जाए तो इसके ऊपर नियंत्रण भी पाया जा सकता है लेकिन कई बार यह बीमारी रोगी को बहुत लंबे समय तक रह सकती है और इस बीमारी के होने पर रोगी को बहुत सारी सावधानियों का भी ध्यान रखना होता है कई लोग इस रोग को हल्के में ले लेते हैं और इसके लिए झाड़-फूंक आदि कराने लगते हैंयह बीमारी 1 से 14 वर्ष के बच्चों में ज्यादा होती है इस बीमारी के होने पर आपको लगभग 11 से 15 दिन तक धब्बे रह सकते हैं या कई बार यह धब्बे 15 से 21 दिन भी रह सकते हैं

चेचक छोटी माता के कारण

अगर इस समस्या के उत्पन्न होने के कारणों के बारे में बात की जाए वैसे तो इस समस्या का सबसे बड़ा और मुख्य कारण इस रोग का वायरोला मेजर या वायरोला माइनर विषाणु होता है जिससे यह रोग एक दूसरे रोगी में फैल जाता है यह विषाणु रोगी की रक्त वाहिकाओं, मुँह और गले आदि में असर दिखाते हैं

वायरोला माइनर विषाणु, वायरोला मेजर विषाणु से कम खतरनाक होता है लेकिन यह विषाणु वायरोला मेजर विषाणु के मुकाबले में ज्यादा तेजी से फैलता है और जितनी जल्दी से यह विषाणु फैलता है उतनी ही जल्दी से रोगी ठीक भी हो सकता है लेकिन वायरोला मेजर विषाणु ज्यादा खतरनाक विषाणु होता है समय पर इलाज न होने से इससे रोगी की मौत भी हो सकती है

चेचक छोटी माता के लक्षण

अगर इस समस्या की लक्षणों के बारे में बात की जाए तो इस समस्या के उत्पन्न होने से कुछ समय पहले रोगी में कई लक्षण देखने को मिल सकते हैं जैसे रोगी को बहुत तेज बुखार आना, रोगी के सिर में बहुत तेज दर्द होना, रोगी की खाज व झुंझ आना, रोगी के पूरे शरीर में ऐंठन होना, रोगी का बदन टूटना, रोगी को उल्टी, चक्कर व बेहोशी की समस्या होना, रोगी की पीठ में दर्द होना, रोगी के गले में दिक्कत होना, रोगी की नाक में पानी बहना,

रोगी के शरीर पर लाल रंग के छोटे धब्बे होना, रोगी के शरीर पर जलन होना, रोगी के धब्बे वाली जगह पर दर्द होना, रोगी के धब्बे में पानी भरना, रोगी की छाती कोहनी शरीर के जोड़ों में तेज दर्द होना, रोगी के शरीर में बार बार बुखार चढ़ना उतरना, रोगी को भूख प्यास न लगना, रोगी का गला सूख जाना, रोगी को बोलने में परेशानी होना, रोगी को बार बार खांसी आना, गले में सूजन होना आदि इस समस्या के लक्षण होते हैं इसके अलावा इस समस्या के और कई लक्षण हो सकते हैं

उपचार

  • रोगी को नीम के पत्तों को पानी में डालकर उबालना चाहिए और फिर उस पानी से नहाना चाहिए इससे आपके शरीर के धब्बों में दर्द से राहत मिलती है
  • रोगी को काली मिर्च खानी चाहिए इसके लिए एक चम्मच प्याज का रस दो तीन काली मिर्च और को पीसकर दिन में तीन से चार बार खाना चाहिए
  • अगर आपके शरीर पर झूम खुजली हो रही है तब आपको जई आटे को पानी में डालकर उबालना चाहिए और फिर उस पानी से स्नान करना चाहिए
  • रोगी को नहाते समय बाल्टी में आधा कप सिरके को डालकर नहाना चाहिए
  • रोगी को हरी मटर पानी में उबालकर इस पानी से स्नान करना चाहिए इससे आपके धब्बे बिल्कुल तेजी से सूख जाएंगे
  • रोगी को अपने धब्बों पर शहद को लगाना चाहिए इससे आपके शरीर से संक्रामक विषाणु तुरंत समाप्त हो जाएंगे
  • रोगी को अपने छोटे बच्चों को चेचक रोग का टीका लगवाना चाहिए जो कि स्वास्थ्य केंद्र पर मुफ्त लगाया जाता है

क्या न करे

  • रोगी को मिर्च वाले भोजन व खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को तले हुए भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को खुली हवा में बाहर नहीं घूमना चाहिए
  • रोगी को अपने धब्बो को नाखून व किसी नुकीली चीज से खुरचना नहीं चाहिए
  • रोगी को अपना शरीर मिट्टी व पानी आदि बचाना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा कठोर भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को घी से बने हुए पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को अपने बिस्तर कपड़े आदि को साफ सुथरा रखना चाहिए
  • रोगी के कपड़ों को नीम के पानी से धोना चाहिए रोगी को सभी बच्चों से अलग रखना चाहिए

लेकिन फिर भी अगर किसी को चेचक रोग की समस्या हो जाती है तब उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए क्योंकि यह एक बहुत ही खतरनाक और जानलेवा बीमारी है इस बीमारी के होने पर देखकर ना आपके लिए महंगा पड़ सकता है इसलिए आप झाड़-फूंक आदि में विश्वास न करें

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