मानसिक रोग के कारण, लक्षण, बचाव व उपचार

मानसिक रोग के कारण, लक्षण, बचाव व उपचार

आजकल के तेजी से बदलते हुए समय और इंटरनेट ने हमारी बच्चों का तो बचपन छीन ही लिया है इसके साथ ही बदलते तेजी से बदलते हुए समय ने बड़े लोगों को भी बदलने पर मजबूर कर दिया है आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में सभी अपने काम से काम रखते हैं और अपने शरीर के ऊपर ध्यान नहीं देते जिनसे हमें कुछ समय के बाद अनेक प्रकार की बीमारियां होने लगती है इसी तरह से मानसिक रोग भी एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जो कि आजकल के तेजी से बदलते समय और इंटरनेट के कारण उत्पन्न होती है क्योंकि हर कोई इंसान सिर्फ मोबाइल या लैपटॉप में लगा रहता है जिससे वह समय पर खाना पीना खेलना और उठना बैठना भी भूल चुका है इसी वजह से हमारे आसपास के बहुत सारे लोगों में मानसिक रोग उत्पन्न हो रहे हैं तो आज किस ब्लॉग में हम मानसिक रोग उत्पन्न होने के कारण लक्षण व इसके उपचार के बारे में बात करेंगे

मानसिक रोग

मानसिक रोग एक ऐसा रोग है जिसके बारे में हमारे समाज में बहुत सारी गलत धारणाएं फैली हुई है जिन को बदलना बहुत जरूरी है क्योंकि कुछ लोगों का मानना है कि मानसिक रोग जैसी कुछ भी समस्या नहीं है और ऐसा कोई भी रोग नहीं है लेकिन वैज्ञानिकों की रिसर्च के द्वारा ऐसा माना गया है कि मानसिक रोग एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिससे रोगी शरीर से बिल्कुल स्वस्थ दिखाई देगा लेकिन वे दिमागी तौर से बिल्कुल कमजोर हो चुका होता है जिसके बारे में उसके आसपास के लोगों को बिल्कुल भी जानकारी नहीं होती है इस रोग को मानसिक स्वास्थ्य विकार, मनोविकार और मानसिक रोग आदि के नाम से जाना जाता है इस समस्या के उत्पन्न होने से रोगी अपनी यादाश्त खोने लगता है उसको बार-बार गुस्सा आता है उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है और वह अकेला रहना पसंद करता है

मानसिक रोग उत्पन्न होने के कारण

किसी भी इंसान को मानसिक रोग उत्पन्न होने के पीछे बहुत सारे कारणों का हाथ हो सकता है लेकिन ज्यादातर लोगों में ऑफिस का काम, एक जगह पर बैठे बैठे काम करना, लगातार ज्यादा समय तक मोबाइल लैपटॉप आदि का इस्तेमाल करना, अकेले रहना, ज्यादा शराब बीड़ी तंबाकू आदि का सेवन करना, मानसिक दबाव होना, लड़ाई का भय होना, किसी बात का डर रहना, सिर पर गहरी चोट लगना, कुपोषण का शिकार होना,अपोस्टिक भोजन करना, ज्यादा काम का दबाव, पति पत्नी में अनबन होना, किसी घटना को बार बार सोचना, किसी से पैसे के लेनदेन का डर रहना,बच्चों की परवरिश का बोज़ होना, किसी बीमारी या दुर्घटना के बारे में सोचते रहना, लड़ाई झगड़ा, इसके अलावा भुखमरी, बेरोजगारी, कुपोषण, गरीबी, कमजोरी वह चिंता इस समस्या के बहुत सारे कारण हो सकते हैं

मानसिक रोग उत्पन्न होने के लक्षण

कुछ लोग इस रोग को अदृश्य रोग के नाम से भी पुकारते हैं क्योंकि इस रोग के उत्पन्न होने से रोगी के शरीर के ऊपर कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते बल्कि उसके रहन सहन से ही इसके लक्षणों के हो पहचाना जा सकता है जैसे रोगी का उदास रहना, रोगी की कार्य क्षमता कमजोर होना, रोगी को डर और भय रहना, रोगी को अपराध की भावना महसूस होना, रोगी का किसी काम में मन न लगना, रोगी के रहन-सहन में बदलाव आना, रोगी को कमजोरी, थकान, आलस व बार-बार नींद आना, रोगी का बहकी बहकी बातें करना, रोगी का स्वभाव गुस्सैल व चिड़चिड़ा होना, रोगी का ज्यादा नशीली दवाओं और शराब आदि का सेवन करना, रोगी को भूख प्यास न लगना, रोगी को छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना, रोगी को खुद को मारने के बारे में सोचना, रोगी को कमर दर्द, पीठ दर्द व सिर दर्द रहना, रोगी को हल्का बुखार और बदन दर्द होना इसके अलावा भी रोगी में इस समस्या के उत्पन्न होने पर कई लक्षण देखने को मिल सकते हैं

क्या करें

  • रोगी को भरपूर नींद लेनी चाहिए
  • रोगी को साफ व हवादार कमरे में रहना चाहिए
  • रोगी को लक्षण दिखाई देते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए
  • रोगी को हमेशा सुपाच्य व हल्का भोजन करना चाहिए
  • रोगी को हर रोज सुबह सुबह खुली हवा में घूमने जाना चाहिए
  • रोगी को हर रोज व्यायाम व प्राणायाम आदि करने चाहिए
  • रोगी को हर रोज सुबह शाम खाना खाने के बाद घूमना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा ही ज्यादा लोगों में रहना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा जोक्स और कॉमेडी वाले शो देखने चाहिए
  • रोगी को सभी के साथ हंसी मजाक करने चाहिए वह एक साथ बैठकर बातें करनी चाहिए
  • रोगी को समय-समय पर चिड़ियाघर सिनेमा हॉल और स्टेडियम आदि में घूमने जाना चाहिए
  • रोगी को ग्रीन टी या चाय पीनी चाहिए
  • रोगी के आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहिए जिससे रोगी को इससे ओ भरने में मदद मिलती है

क्या नहीं करें

  • रोगी को अकेला बिल्कुल भी नहीं रहना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा हस्तमैथुन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा मानसिक दबाव वाले कार्य नहीं करने चाहिए
  • रोगी को पूरा दिन एक जगह पर बैठे बैठे काम नहीं करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा संभोग की इच्छा में लिप्त नहीं होना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा शराब तंबाकू बीड़ी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए
  • रोगी को अपने आप पर भरोसा रखना चाहिए वह खुद के मन में गंदे विचार नहीं लाने चाहिए
  • रोगी को अपने शरीर में कब्ज की समस्या उत्पन्न नहीं होने देनी चाहिए
  • रोगी को ज्यादा मानसिक तनाव, चिंता और लड़ाई झगड़े में नहीं पड़ना चाहिए
  • रोगी को अपने शरीर का वजन नहीं बढ़ने देना चाहिए
  • रोगी को किसी चीज के बारे में ज्यादा गहराई से नहीं सोचना चाहिए

लेकिन फिर भी अगर किसी इंसान में मानसिक रोग से जुड़े हुए कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तब उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और अपने टेस्ट आदि करवाकर अच्छी से दवाई लेनी चाहिए क्योंकि यह एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है इससे रोगी मानसिक रूप से बिल्कुल कमजोर हो जाता है इसलिए इस समस्या में देरी करना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है

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