रतौंधी रोग क्या है इसके कारण लक्षण बचाव व उपचार

रतौंधी रोग क्या है इसके कारण, लक्षण, बचाव व उपचार

इससे पहले हमने आपको आंख से जुड़े हुए कई रोगो के बारे में बताया है क्योंकि आप हमारे शरीर का एक अभिन्न अंग होती है और इसकी सुरक्षा करना हमारे लिए बहुत जरूरी है अगर किसी इंसान के हाथ पांव या शरीर का कोई अन्य भाग काम करना बंद कर देता है तब भी हम इतनी ज्यादा दुखी नहीं होते लेकिन अगर किसी इंसान की आंख से दिखाई देना बंद हो जाता है तब इंसान कुछ भी नहीं देख पाता और वह दूसरों के सहारे ही अपनी जिंदगी जीता है इसलिए हमें अपनी आंखों को बचाना बहुत जरूरी है तो इस ब्लॉग में हम एक बार फिर से ऐसे ही आंखों से जुड़े रोग के बारे में बात करने वाले हैं इस ब्लॉग में हम रतौंधी रोग के बारे में बात करेंगे इस ब्लॉग में हम इस समस्या के उत्पन्न होने के कारण, लक्षण, बचाव व उपचार के बारे में विस्तार से जानेंगे

रतौंधी

रतौंधी रोग एक ऐसा रोग है जो कि हमारी आंखों में उत्पन्न होता है इस समस्या के उत्पन्न हो जाने पर रोगी को रात के समय में कम दिखाई देता है यह रोग रोगी को जन्म से भी हो सकता है क्योंकि यह रोग कुपोषण के कारण भी उत्पन्न हो सकता है शुरुआत में यह रोग इतना ज्यादा बड़ा नहीं होता लेकिन कुछ समय बाद यह धीरे-धीरे अपनी पकड़ बना लेता है और रोगी को रात में कम दिखाई देता है रतौंधी रोग होने पर हमारी आंख में मौजूद रॉड कोशिकाएं अपनी प्रकाश और प्रकाश से मिलने वाली प्रतिक्रिया को देने की क्षमता खो देती है और हमारी आंख के रेटिना में मौजूद कोशिकाओं के सेल टूटने लगते हैं जिनसे शुरू शुरू में हमें हल्का दिखाई देने लगता है

और फिर धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ जाती है और कई लोगों में यह रोग जन्मजात होता है क्योंकि उनकी रॉड कोशिकाएं जन्म से ही काम नहीं करती लेकिन बहुत सारे लोग इस समस्या को अंधापन समझ लेते हैं लेकिन अंधापन और रतौंधी रोग बिल्कुल अलग अलग होते हैं क्योंकि रतौंधी रोग में रोगी को कम दिखाई देने लगता है जबकि अंधेपन में रोगी की आंखें बिल्कुल काम करना बंद कर देती है और इस और रतौंधी रोग होने पर रोगी की आंखों को दोबारा से इलाज के जरिए ठीक भी किया जा सकता है

कारण

अगर रतौंधी रोग के कारणों के बारे में बात की जाए तो इस समस्या के कई अलग-अलग कारण होते हैं बहुत सारे लोगों में यह रोग जन्मजात भी होता है इसके अलावा रोगी में विटामिन ए की कमी होना, रोगी के शरीर में अन्य पोषक तत्वों की कमी होना, जैसे विटामिन, मिनरल, जिंक आदि, रोगी में लीवर की समस्या उत्पन्न होना, रोगी को मोतियाबिंद होना, रोगी का लगातार तेज रोशनी में धूप में काम करना, रोगी के शरीर में मधुमेह की समस्या उत्पन्न होना, जिससे रोगी की आंखों किडनी व लीवर आदि के ऊपर प्रभाव पड़ता है यह कुछ ऐसे कारण होते हैं जो कि रतौंधी रोग को उत्पन्न करते हैं

लक्षण

अगर रतौंधी रोग के लक्षणों के बारे में बात की जाए तो इस समस्या के बहुत सारे लक्षण है जो कि आप आसानी पहचान सकते हैं जैसे रोगी को शुरू में हल्का दिखाई देना, रोगी को कम रोशनी में ठीक दिखाई नहीं देना, रोगी को ड्राइविंग करते समय कठिनाई आना, रोगी को सिर में दर्द होना, रोगी की आंखों में दर्द रहना, रोगी की देखने की शक्ति कम होना, रोगी की आंखों में जाला आना,

रोगी को रात के समय में दिखाई ना देना, रोगी को दूर की चीजें देखने में कठिनाई आना, रोगी का किसी छोटी चीज को कम रोशनी में सही से देख पाना समस्या के मुख्य लक्षण होते हैं इसके अलावा भी आपको कई और लक्षण दिखाई दे सकते हैं जैसे आंखों में पानी आना, आंखों में झुंज आना व आंखों को रगड़ने का मन करना आदि

बचाव

अगर किसी इंसान की आंखों में रतौंधी रोग से जुड़ी हुए कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तब रोगी को तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और रोगी को कुछ ऐसी बातों का ध्यान रखना चाहिए जो कि इस समस्या को कम करने में आपके लिए सहायक हो सकती है जैसे

  • रोगी को समय-समय पर अपनी आंखों के टेस्ट करवाते रहना चाहिए
  • रोगी को एकदम से तेज रोशनी के सामने नहीं जाना चाहिए
  • रोगी को तेज धूप व तेज रोशनी के सामने काम करने से बचना चाहिए
  • रोगी को बाहर जाते समय अपनी आंखों को ढकना चाहिए
  • रोगी को बाइक व स्कूटर चलाते समय अपनी आंखों के ऊपर चश्मा व हेलमेट आदि लगाना चाहिए
  • रोगी को हर रोज सुबह अपनी आंखों को ठंडे पानी से धोना चाहिए
  • रोगी को समय-समय पर अपनी आंखों में आई ड्रॉप डालनी चाहिए
  • रोगी को अपनी आंखों को धूल मिट्टी दुबे व केमिकल और दवाइयों आदि से बचा कर रखना चाहिए
  • रोगी को अपनी आंखों को गंदे हाथों व गंदे कपड़े आदि से नहीं छूना चाहिए
  • रोगी को अपनी आंखों को गंदे पानी से बचाकर रख बचाना चाहिए
  • रोगी को अपनी आंखों के ऊपर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए
  • रोगी को कम लाइट में पढ़ने लिखने में किसी अन्य काम को करने से बचना चाहिए
  • रोगी को लंबे समय तक टीवी कंप्यूटर लैपटॉप मोबाइल फोन आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
  • रोगी को अपनी आंखों को RGB लाइटों से बचा कर रखना चाहिए
  • रोगी को लंबे समय तक एक ही चीज को लगातार नहीं देखना चाहिए
  • रोगी को खुली आंखों से सूरज की तरफ नहीं देखना चाहिए
  • आपकी आंख में चोट लगने पर या कुछ गिर जाने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए

 

उपचार

अगर किसी इंसान की आंख में रतौंधी रोग से संबंधित समस्या हो जाती है तब रोगी को तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए डॉक्टर आपकी आंखों की जांच करते हैं और आपकी आंखों के अलग-अलग टेस्ट करते हैं जैसे बायोमाइक्रोस्कॉपी, फंडोस्कोपी और इलेक्ट्रोरेटिनोग्राम टेस्ट आदि उनके जरिए आप की आंखों की रॉड की प्रकाश प्रतिक्रिया को नापा जाता है और फिर उसी के आधार पर आपको अलग-अलग उपचार दिए जाते हैं

इसके अलावा रोगी की समस्या को दूर इसके अलावा आप कुछ ऐसी घरेलू चीजों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो कि आप को इस रोग से बचाने में सहायक होती है जैसे

  • रोगी को ज्यादा से ज्यादा हरी व कच्ची सब्जियों का सेवन करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा से ज्यादा विटामिन ए के स्त्रोत वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा से ज्यादा जिंक विटामिन और मिनरल्स वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा से ज्यादा तरबूज खाना चाहिए क्योंकि तरबूज रतौंधी के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है
  • आपको सीताफल, शकरकंदी और पपीते आदि का सेवन करना चाहिए यह सभी चीजें भी आपको इस रोग से बचाने में सहायक होती है
  • रोगी को स्ट्रॉबेरी जामुन अंगूर आदि का सेवन करना चाहिए

लेकिन फिर भी अगर किसी इंसान की आंख में जरा सी भी तकलीफ होती है तब उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी आंखों के टेस्ट करवाने चाहिए और नियमित रूप से दवाइयां लेनी चाहिए क्योंकि एक बहुत ही खतरनाक समस्या है इससे आपकी आंखें बिल्कुल कमजोर हो जाती है

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